Know Why Kejriwal Is On Dharna, The Undeclared Agenda Of AAP

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दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल दिल्ली पुलिस पर अपनी सरकार के नियंत्रण के लिए मंगलवार को दूसरे दिन भी धरने पर बैठे हुए हैं। वे सड़क से ही सरकार चलाने का भी दावा कर रहे हैं। लेकिन पहले दिन उनकी सरकार ने रेल भवन के नजदीक पार्क में बैठकर महज 50 फाइलें निपटाईं। लेकिन प्रशासन के कई अहम काम अटक गए हैं।

 संविधान विशेषज्ञ सुभाष कश्यप का कहना है कि मुख्यमंत्री और मंत्रियों ने पद और गोपनीयता की शपथ ली है। इसके तहत संविधान के दायरे में काम करने की बात है। संविधान के तहत दिल्ली पूर्ण राज्य नहीं है और पुलिस केंद्र सरकार के पास है। ऐसे में इसको लेकर सड़कों पर इस तरह से टकराव नहीं हो सकता। पुलिस को निर्देश देना राज्य सरकार का काम नहीं है। मंत्री अगर पुलिस को निर्देश दे रहे थे तो यह भी पुलिस के कामकाज में दखल है और यह नियम के खिलाफ है। राज्य सरकार को संविधान के तहत जो दायित्व दिया गया है, उन्हें उसका निर्वाह करना चाहिए। पुलिस के कामकाज में वह दखल नहीं दे सकते।
 
सीएम की कुर्सी पर रहते हुए धरने पर बैठने वाले केजरीवाल पर आलोचना का कोई असर नहीं हो रहा है। उन्होंने खुद को एनार्किस्ट (अराजकतावादी) तक करार दे दिया है। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल के धरने का घोषित एजेंडा दिल्ली पुलिस को उनकी सरकार के नियंत्रण में लाना है। लेकिन जानकारों की राय में केजरीवाल की इस कोशिश का असल मकसद कुछ और है और कुछ हद तक धरना केजरीवाल की मजबूरी भी है।  
 

आगे की स्लाइड में पढ़िए, धरने के पीछे संभावित छुपा हुआ एजेंडा और मजबूरी:

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